🚨 BREAKING NEWS
Advertisement

🎯 Advertise Here!

Click to partner with us and reach our growing Uttarakhand audience.

Homeपर्यटननगरासू प्रकरण: तीन दिन बाद खत्म हुआ गतिर...

नगरासू प्रकरण: तीन दिन बाद खत्म हुआ गतिरोध, लेकिन सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल

P
By Pahadnews24
June 23, 2026 • 1 min read
नगरासू प्रकरण: तीन दिन बाद खत्म हुआ गतिरोध, लेकिन सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल
नगरासू प्रकरण: तीन दिन बाद खत्म हुआ गतिरोध, लेकिन सरकार और प्रशासन की कार्यशैली पर उठे सवाल (Photo: Pahad News)

रुद्रप्रयाग। नगरासू स्थित गुरुद्वारे में पिछले तीन दिनों से जारी गतिरोध आखिरकार समाप्त हो गया। गुरुद्वारे की चौथी मंजिल और छत पर डटे चार निहंग सिख प्रशासन और पुलिस के साथ लंबी वार्ता के बाद नीचे उतर आए और पंजाब के लिए रवाना हो गए। हालांकि, विवाद के शांतिपूर्ण समाधान के बावजूद सरकार और प्रशासन की कार्यप्रणाली को लेकर कई सवाल खड़े हो गए हैं।


 

स्थानीय लोगों का कहना है कि जब चार लोग तीन दिनों तक गुरुद्वारे की छत और चौथी मंजिल पर डटे रहे, तब प्रशासन उन्हें नीचे उतारने में असहाय नजर आया। पूरे घटनाक्रम के दौरान पुलिस और प्रशासन केवल वार्ता और समझाइश तक सीमित दिखाई दिए। ऐसे में सवाल उठ रहा है कि यदि यही स्थिति किसी अन्य आंदोलन या विरोध प्रदर्शन में होती, तो क्या प्रशासन का रवैया इतना ही संयमित रहता?


 

आलोचकों का कहना है कि उत्तराखंड में कई बार स्थानीय युवाओं, मूल निवास, भू-कानून या अन्य जनसरोकारों से जुड़े आंदोलनों पर पुलिस तत्काल कार्रवाई करती है, प्रदर्शनकारियों को हिरासत में लिया जाता है और बल प्रयोग तक देखने को मिलता है। लेकिन नगरासू प्रकरण में प्रशासन कई दिनों तक केवल समझाने की भूमिका में दिखाई दिया।


 

विपक्षी दलों और सामाजिक संगठनों ने भी कानून के समान अनुपालन का मुद्दा उठाया है। उनका कहना है कि कानून सबके लिए बराबर होना चाहिए और किसी भी परिस्थिति में दोहरे मापदंड नहीं अपनाए जाने चाहिए। यदि कानून-व्यवस्था प्रभावित होती है तो कार्रवाई व्यक्ति, समुदाय या संगठन देखकर नहीं बल्कि कानून के अनुसार होनी चाहिए।


 

हालांकि प्रशासन का दावा है कि मामले की संवेदनशीलता को देखते हुए शांतिपूर्ण समाधान को प्राथमिकता दी गई और किसी भी अप्रिय घटना से बचने के लिए धैर्य और संवाद का रास्ता अपनाया गया। लेकिन इस पूरे प्रकरण ने राज्य में कानून-व्यवस्था, प्रशासनिक निर्णयों और कार्रवाई के मानकों को लेकर नई बहस छेड़ दी है। अब देखना होगा कि सरकार इन सवालों का क्या जवाब देती है और भविष्य में ऐसे मामलों में क्या नीति अपनाई जाती है।


 

पर्यटन UTTARAKHAND