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विकास का ढोल पीट रहे नुमाइंदे, 80 वर्षीय बुजुर्ग को डंडे से बांधकर पहुंचाया अस्पताल

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By Pahadnews24
August 24, 2026 • 1 min read
विकास का ढोल पीट रहे नुमाइंदे, 80 वर्षीय बुजुर्ग को डंडे से बांधकर पहुंचाया अस्पताल
विकास का ढोल पीट रहे नुमाइंदे, 80 वर्षीय बुजुर्ग को डंडे से बांधकर पहुंचाया अस्पताल (Photo: Pahad News)

चंपावत: उत्तराखंड के पहाड़ी इलाकों में सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव आज भी ग्रामीणों के लिए बड़ी मुसीबत बना हुआ है। चंपावत जिले के नेपाल सीमा से लगे तल्लादेश क्षेत्र के बकोड़ा गांव से सामने आई तस्वीरें विकास के दावों पर सवाल खड़े करती हैं। गांव में सड़क नहीं होने के कारण पैर में चोट लगने से परेशान 80 वर्षीय दीवान सिंह को ग्रामीणों ने डंडे के सहारे बांधकर करीब आठ किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाया। इसके बाद वाहन से उन्हें करीब 35 किलोमीटर दूर टनकपुर उपजिला चिकित्सालय ले जाया गया।

जानकारी के मुताबिक दीवान सिंह के पैर में कुछ चुभ गया था। दर्द बढ़ने पर उन्हें अस्पताल ले जाने की जरूरत पड़ी, लेकिन गांव तक सड़क नहीं होने के कारण ग्रामीणों के सामने उन्हें पैदल सड़क तक पहुंचाने के अलावा कोई विकल्प नहीं था। लगातार बारिश के बीच ग्रामीण रवींद्र रावत, जगदीश सिंह, प्रियांशु और केदार ने बारी-बारी से कंधा देकर बुजुर्ग को डंडे के सहारे करीब दो घंटे में मोस्टा से सीम गांव की सड़क तक पहुंचाया। इस घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

 

2012 से सड़क का इंतजार

बकोड़ा सहित तल्लादेश क्षेत्र के ग्रामीण वर्ष 2012 से सड़क सुविधा का इंतजार कर रहे हैं। सड़क नहीं होने के कारण मरीजों और घायलों को आज भी डोली, कंधे या डंडे के सहारे कई किलोमीटर पैदल सड़क तक पहुंचाना पड़ता है। ग्रामीणों का कहना है कि सड़क के अभाव में क्षेत्र से पलायन भी बढ़ रहा है।

 

ग्राम प्रधान रवींद्र रावत के मुताबिक मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क बनने से अकेड़ी, मोस्टा, ग्वानी और बकोड़ा समेत आसपास के गांवों की 500 से अधिक आबादी को सीधा लाभ मिलेगा।

 

18.30 करोड़ की डीपीआर मंजूरी का इंतजार

पीएमजीएसवाई चंपावत के अधिशासी अभियंता वीरेंद्र सिंह बोहरा के अनुसार 22.30 किलोमीटर लंबी मंच-मोस्टा-बकोड़ा सड़क से संबंधित सभी औपचारिकताएं पूरी कर ली गई हैं। सड़क निर्माण के लिए 18.30 करोड़ रुपये की डीपीआर स्वीकृति के लिए भारत सरकार को भेजी गई है। वन प्रस्ताव भी अपलोड किया जा चुका है और स्वीकृति मिलने के बाद सड़क निर्माण शुरू किया जाएगा।

 

गौर करने वाली बात यह है कि बकोड़ा गांव जिस विधानसभा क्षेत्र में आता है, उसका प्रतिनिधित्व स्वयं प्रदेश के मुख्यमंत्री करते हैं। ऐसे में 80 वर्षीय बुजुर्ग को इलाज के लिए आठ किलोमीटर तक डंडे के सहारे ढोकर सड़क तक पहुंचाने की तस्वीरें पहाड़ में विकास की जमीनी हकीकत पर गंभीर सवाल खड़े कर रही हैं।


 

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