भवाली केस: ‘इन हरकतों का परिवार और बच्चों पर क्या असर पड़ेगा?’ हाईकोर्ट की टिप्पणी ने खींचा ध्यान
नैनीताल: भवाली में एक नाबालिग युवती से कथित यौन शोषण और धमकी से जुड़े मामले में उत्तराखंड हाईकोर्ट ने भवाली उद्योग व्यापार मंडल के अध्यक्ष नरेश पांडे की जमानत याचिका पर सुनवाई की। सुनवाई के दौरान अदालत ने फिलहाल याचिकाकर्ता को कोई राहत नहीं दी और राज्य सरकार को दो सप्ताह के भीतर मामले में विस्तृत जवाब दाखिल करने के निर्देश दिए।
राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि कथित घटना के समय पीड़िता नाबालिग थी और उसकी उम्र 17 वर्ष थी। सुनवाई के दौरान अदालत की मौखिक टिप्पणी भी चर्चा में रही। कोर्ट ने सवाल उठाते हुए कहा कि कुछ लोग ऐसे कृत्य क्यों कर रहे हैं, जो कभी समाज का आईना हुआ करते थे। अदालत ने यह भी चिंता जताई कि पैसा और प्रभाव आने के बाद कुछ लोग यह भूल जाते हैं कि उनकी कथित हरकतों और आपराधिक कृत्यों का उनके अपने परिवार और बच्चों पर क्या प्रभाव पड़ सकता है।
मामले की पृष्ठभूमि के अनुसार, पीड़िता ने कुछ समय पहले भवाली उद्योग व्यापार मंडल अध्यक्ष नरेश पांडे के खिलाफ शादी का झांसा देकर दुष्कर्म करने का आरोप लगाते हुए नैनीताल कोतवाली में मुकदमा दर्ज कराया था। बाद में युवती ने उक्त मामला वापस ले लिया और तल्लीताल थाने में तीन अन्य युवकों के खिलाफ शिकायत दर्ज कराई।
नई शिकायत में युवती ने आरोप लगाया कि उक्त तीनों युवकों ने उसका वीडियो वायरल करने की धमकी दी और व्यापार मंडल अध्यक्ष के खिलाफ झूठा मुकदमा दर्ज कराने के लिए उस पर दबाव बनाया। मामले में अब हाईकोर्ट ने राज्य सरकार से विस्तृत जवाब मांगा है। अदालत की अगली सुनवाई में सरकार का पक्ष सामने आने के बाद मामले की आगे की स्थिति स्पष्ट होगी।
नोट: मामले में लगाए गए आरोप न्यायिक प्रक्रिया के अधीन हैं और आरोपों की पुष्टि होना अभी बाकी है।