आजादी के जश्न के बीच जजरेड़ भूस्खलन को लेकर धरना, कालसी-चकराता मार्ग को लेकर उठी बड़ी मांग
विकासनगर: देशभर में स्वतंत्रता दिवस का जश्न मनाया जा रहा है, वहीं उत्तराखंड के विकासनगर में जजरेड़ भूस्खलन की समस्या को लेकर धरना प्रदर्शन किया गया। जौनसार-बावर की लाइफलाइन कहे जाने वाले कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर जजरेड़ भूस्खलन क्षेत्र के पास भारत संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के कार्यकर्ताओं ने सड़क किनारे धरना दिया। इस दौरान मुख्यमंत्री को संबोधित मांग पत्र तहसील प्रशासन को सौंपकर समस्या के स्थायी समाधान की मांग की गई।
कालसी-चकराता मोटर मार्ग पर जजरेड़ पहाड़ी का भूस्खलन पिछले एक दशक से अधिक समय से स्थानीय लोगों के लिए बड़ी परेशानी बना हुआ है। बरसात के मौसम में पहाड़ी से भारी मात्रा में मलबा और बोल्डर सड़क पर आने के कारण मार्ग बार-बार बाधित हो जाता है। इससे मरीजों को अस्पताल पहुंचाने में परेशानी होती है, वहीं किसानों की नगदी फसलें समय पर मंडी तक नहीं पहुंच पातीं। सड़क बंद होने से क्षेत्र के लोगों को आवागमन में भी काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ता है।
मार्ग को सुचारू रखने के लिए लोनिवि सहिया की ओर से जजरेड़ भूस्खलन जोन में दो जेसीबी मशीनें तैनात की गई हैं। मार्ग बाधित होने पर इन मशीनों की मदद से मलबा हटाया जाता है। हालांकि, भारी बारिश के दौरान लगातार हो रहे भूस्खलन के बीच मलबा हटाने का काम जेसीबी चालकों के लिए भी जोखिम भरा बना रहता है।
धरने का नेतृत्व भारत संवैधानिक अधिकार संरक्षण मंच के दौलत कुंवर ने किया। मुख्यमंत्री को संबोधित ज्ञापन में उन्होंने कहा कि जजरेड़ की समस्या लंबे समय से क्षेत्रवासियों के लिए परेशानी का कारण बनी हुई है और हर बरसात में इससे सरकारी धन के साथ-साथ आम जनता को भी नुकसान उठाना पड़ता है। उन्होंने बताया कि 15 अगस्त को जजरेड़ के समीप शांतिपूर्ण धरना देने की घोषणा करीब 15 दिन पहले ही की गई थी।
दौलत कुंवर ने कहा कि 14 अगस्त को सोशल मीडिया के माध्यम से उन्हें जानकारी मिली कि कालसी-चकराता मार्ग को स्टेट हाईवे से राष्ट्रीय राजमार्ग घोषित किया गया है। उन्होंने संबंधित शासनादेश की प्रति 15 दिनों के भीतर उपलब्ध कराने की मांग की है। साथ ही चेतावनी दी कि यदि निर्धारित समय में शासनादेश उपलब्ध नहीं कराया गया तो 20 दिन बाद जौनसारी ढोल-दमाऊ और रणसिंगे के साथ जिलाधिकारी देहरादून कार्यालय के बाहर अनिश्चितकालीन धरना शुरू किया जाएगा।
स्थानीय लोगों का कहना है कि जजरेड़ भूस्खलन का स्थायी समाधान केवल हर बार मलबा हटाने से नहीं होगा, बल्कि संवेदनशील पहाड़ी क्षेत्र का वैज्ञानिक उपचार और सड़क की दीर्घकालिक सुरक्षा जरूरी है।