श्वेता मेहरा और इंदर आर्या के आरोपों से YUCA Awards 2026 पर उठे सवाल, क्या ‘अवार्ड्स बिकने’ लगे हैं?
नई दिल्ली में 30 अगस्त 2026 को आयोजित होने जा रहे यंग उत्तराखंड सिने अवॉर्ड्स (YUCA) को लेकर सोशल मीडिया पर विवाद खड़ा हो गया है। विवाद की शुरुआत अभिनेत्री श्वेता मेहरा की एक सोशल मीडिया पोस्ट से हुई, जिसमें उन्होंने इस साल के नामांकनों पर सवाल उठाते हुए लिखा कि “अवार्ड्स बिकने का टाइम आ गया है” और लोकप्रिय गीत “जिया कोरी कोरी खांदो” को नॉमिनेशन में जगह नहीं मिलने पर निराशा जताई। यह गीत किशन महिपाल का है और इसमें अभिनेत्री तन्नू रावत प्रमुख भूमिका में हैं। श्वेता मेहरा की पोस्ट के बाद मामला उस समय और गंभीर हो गया जब गायक इंदर आर्या ने उनकी पोस्ट शेयर करते हुए YUCA के पिछले आयोजन से जुड़े अपने अनुभव सार्वजनिक किए। इंदर आर्या ने दावा किया कि उन्होंने वर्षों से कई हिट गीत दिए, लेकिन उन्हें सम्मान नहीं मिला। उन्होंने पिछले वर्ष रिहर्सल के दौरान कलाकारों को दिए गए अलग-अलग समय, मंच पर तैयारियों के विपरीत प्रस्तुति और कलाकारों के लिए कथित तौर पर अलग-अलग स्तर की होटल व्यवस्था का जिक्र करते हुए इसे “भेदभाव” बताया। हालांकि, इन आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है और YUCA आयोजकों की ओर से इन दावों पर आधिकारिक प्रतिक्रिया सामने आना अभी बाकी है।
इस पूरे विवाद के बीच अब एक बड़ा सवाल उत्तराखंडी संगीत की बदलती दिशा को लेकर भी उठ रहा है क्या संगीत अब सिर्फ Views और Likes का खेल बनकर रह गया है? आलोचकों का कहना है कि आज के दौर में सोशल मीडिया पर लोकप्रियता और वायरल होने को कई बार गीत की गुणवत्ता से जोड़कर देखा जाने लगा है। उनका तर्क है कि नए दौर के कुछ गीतों में शब्दों और भावों की गहराई की कमी दिखाई देती है, जबकि उत्तराखंड के पुराने और स्थापित लोकगायकों के गीतों में भाषा, भाव, पहाड़ की संस्कृति और सामाजिक सरोकारों की स्पष्ट झलक मिलती थी। आलोचक यह भी मानते हैं कि कुछ नए कलाकारों को शुरुआती सफलता और सोशल मीडिया की लोकप्रियता मिलने के बाद अति-आत्मविश्वास या अहंकार से बचना चाहिए, क्योंकि संगीत की असली पहचान केवल व्यूज और लाइक्स से नहीं, बल्कि लंबे समय तक लोगों के दिलों में बने रहने वाले काम से होती है। हालांकि, नए कलाकारों की पूरी पीढ़ी को एक ही नजरिए से देखना भी उचित नहीं होगा, क्योंकि कई युवा गायक उत्तराखंडी संगीत में नए प्रयोग करते हुए अपनी पहचान बना रहे हैं।
YUCA की शुरुआत वर्ष 2009 में ‘यंग उत्तराखंड’ संस्था द्वारा उत्तराखंडी सिनेमा, संगीत, लोककला और संस्कृति को प्रोत्साहित करने के उद्देश्य से की गई थी। ऐसे में पुरस्कारों के नामांकन और चयन प्रक्रिया को लेकर उठ रहे सवालों पर आयोजकों की ओर से पारदर्शी स्पष्टीकरण बेहद महत्वपूर्ण हो जाता है। सोशल मीडिया पर जहां कुछ लोग कलाकारों के आरोपों को गंभीरता से लेने की बात कह रहे हैं, वहीं कुछ इसे व्यक्तिगत नाराजगी और मतभेद के रूप में देख रहे हैं। फिलहाल आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि नहीं हुई है। उत्तराखंड की संगीत और फिल्म इंडस्ट्री जिस तेजी से आगे बढ़ रही है, ऐसे में जरूरी है कि लोकप्रियता के साथ गुणवत्ता, वरिष्ठ कलाकारों का सम्मान, नए कलाकारों को अवसर और पुरस्कार प्रक्रिया में पारदर्शिता—इन सभी को बराबर महत्व मिले।