🚨 BREAKING NEWS
Advertisement

🎯 Advertise Here!

Click to partner with us and reach our growing Uttarakhand audience.

Homeउत्तराखंडउत्तराखंड के कई इलाकों में भूजल स्तर की...

उत्तराखंड के कई इलाकों में भूजल स्तर की स्थिति गंभीर, CGWB की स्टडी में खुलासा; विशेषज्ञों ने दी ये सलाह

P
By Pahadnews24
August 16, 2026 • 1 min read
उत्तराखंड के कई इलाकों में भूजल स्तर की स्थिति गंभीर, CGWB की स्टडी में खुलासा; विशेषज्ञों ने दी ये सलाह
उत्तराखंड के कई इलाकों में भूजल स्तर की स्थिति गंभीर, CGWB की स्टडी में खुलासा; विशेषज्ञों ने दी ये सलाह (Photo: Pahad News)

देहरादून: उत्तराखंड भले ही गंगा और यमुना जैसी प्रमुख नदियों का उद्गम स्थल है और देश के बड़े हिस्से की जल जरूरतों में योगदान देता है, लेकिन राज्य के कई इलाकों में भूजल स्तर की स्थिति चिंताजनक बनी हुई है। केंद्रीय भूजल बोर्ड (CGWB) की ओर से किए गए अध्ययन में प्रदेश के विशेष रूप से मैदानी क्षेत्रों में भूजल के अत्यधिक दोहन की स्थिति सामने आई है। विशेषज्ञों ने भूजल के इस्तेमाल को नियंत्रित करने के साथ-साथ प्राकृतिक जलस्रोतों और स्प्रिंग्स के संरक्षण पर जोर दिया है।

 

राष्ट्रीय भूजल निगरानी कार्यक्रम के तहत केंद्रीय भूजल बोर्ड ने उत्तराखंड में भूजल की स्थिति का विस्तृत आकलन किया। मई 2026 तक प्रदेश के 340 स्थानों पर भूजल की निगरानी की गई। इसके लिए 21 खुले कुओं, 196 हैंडपंपों, 111 प्राकृतिक जलस्रोतों (स्प्रिंग्स) और 12 पीजोमीटरों का इस्तेमाल किया गया। अध्ययन के जरिए राज्य के विभिन्न जलभृतों (Aquifers) में भूजल की स्थिति तथा समय और स्थान के साथ होने वाले बदलावों का आकलन किया गया।

 

रिपोर्ट में उत्तराखंड में भूजल की स्थिति के मिश्रित संकेत सामने आए हैं। अध्ययन के मुताबिक कुछ क्षेत्रों में कुओं और जलस्रोतों के जलस्तर में सुधार दर्ज किया गया है, जबकि कई इलाकों में भूजल स्तर में गिरावट देखी गई है। प्राकृतिक स्प्रिंग्स के डिस्चार्ज में कमी को भी विशेषज्ञों ने चिंता का विषय माना है।

 

मैदानी क्षेत्रों में ज्यादा दबाव

अध्ययन में खास तौर पर उत्तराखंड के मैदानी क्षेत्रों में भूजल के अत्यधिक दोहन की स्थिति सामने आई है। बढ़ती आबादी, शहरीकरण, कृषि गतिविधियों और पानी की बढ़ती मांग के कारण भूजल संसाधनों पर दबाव लगातार बढ़ रहा है। यदि भूजल के दोहन और पुनर्भरण के बीच संतुलन नहीं बनाया गया तो आने वाले समय में कई क्षेत्रों में जल संकट गहरा सकता है।

 

स्प्रिंग्स प्रबंधन पर जोर

विशेषज्ञों ने भूजल के अत्यधिक दोहन को कम करने के साथ-साथ उत्तराखंड के प्राकृतिक जलस्रोतों और स्प्रिंग्स के संरक्षण एवं वैज्ञानिक प्रबंधन की आवश्यकता बताई है। बारिश के पानी को अधिक से अधिक जमीन में पहुंचाने के लिए वर्षा जल संचयन, जल पुनर्भरण संरचनाओं और स्थानीय जलस्रोतों के संरक्षण को बढ़ावा देने की जरूरत है।

 

उत्तराखंड जैसे पर्वतीय राज्य में स्प्रिंग्स ग्रामीण और पहाड़ी क्षेत्रों की जल आपूर्ति का महत्वपूर्ण आधार हैं। ऐसे में इनके डिस्चार्ज में कमी को भविष्य के जल संकट का संकेत माना जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार भूजल और प्राकृतिक जलस्रोतों की नियमित निगरानी के साथ स्थानीय स्तर पर जल संरक्षण की योजनाओं को प्रभावी ढंग से लागू करना जरूरी है।


 

उत्तराखंड UTTARAKHAND