🚨 BREAKING NEWS
Advertisement

🎯 Advertise Here!

Click to partner with us and reach our growing Uttarakhand audience.

Homeउत्तराखंड21 साल से कम उम्र में शादी पर हाईकोर्ट क...

21 साल से कम उम्र में शादी पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, विवाहित जोड़े की सुरक्षा के दिए आदेश

P
By Pahadnews24
July 6, 2026 • 1 min read
21 साल से कम उम्र में शादी पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, विवाहित जोड़े की सुरक्षा के दिए आदेश
21 साल से कम उम्र में शादी पर हाईकोर्ट का अहम फैसला, विवाहित जोड़े की सुरक्षा के दिए आदेश (Photo: Pahad News)

नैनीताल: उत्तराखंड हाईकोर्ट ने विवाह के समय युवक की उम्र 21 वर्ष से कम होने के मामले में दायर सुरक्षा याचिका पर अहम आदेश जारी किया है। कोर्ट ने कहा कि यदि विवाहित जोड़े की जान या शारीरिक सुरक्षा को खतरा है, तो उन्हें पुलिस संरक्षण दिया जाना चाहिए।

न्यायमूर्ति आलोक महरा की एकलपीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश दिया कि दोनों की सुरक्षा को लेकर खतरे का आकलन किया जाए। यदि वास्तविक खतरा पाया जाता है तो आवश्यक पुलिस सुरक्षा उपलब्ध कराई जाए।

 

क्या है मामला?

याचिकाकर्ताओं ने बताया कि उन्होंने 24 मार्च 2026 को विवाह किया था। हाईस्कूल प्रमाणपत्र के अनुसार विवाह के समय युवती की उम्र 19 वर्ष 6 माह थी, जबकि युवक 20 वर्ष का था। युवती के परिवार ने इस विवाह का विरोध किया और दोनों को जान से मारने की धमकियां मिलने का आरोप लगाया गया।

 

सुनवाई के दौरान कोर्ट ने पहले दोनों पक्षों को परामर्शदाता (काउंसलर) के सामने पेश होने का निर्देश दिया था। परामर्शदाता की रिपोर्ट में कहा गया कि युवती अपने माता-पिता के साथ नहीं जाना चाहती और वह अपने पति के साथ रहकर खुश है।

 

विवाह की वैधता पर क्या कहा गया?

निजी पक्ष की ओर से दलील दी गई कि विवाह के समय युवक की उम्र 21 वर्ष पूरी नहीं हुई थी, इसलिए विवाह वैध नहीं माना जा सकता। वहीं याचिकाकर्ताओं ने कहा कि यदि युवक की आयु 21 वर्ष से कम थी, तब भी यह अधिकतम निरस्तीकरण योग्य (voidable) विवाह का विषय हो सकता है, लेकिन केवल इसी आधार पर उन्हें सुरक्षा से वंचित नहीं किया जा सकता, खासकर जब उन्हें लगातार जान से मारने की धमकियां मिल रही हों।

 

कोर्ट ने कहा कि परामर्शदाता की रिपोर्ट से स्पष्ट है कि युवती अपनी इच्छा से पति के साथ रह रही है और माता-पिता के साथ नहीं जाना चाहती। ऐसे में Lata Singh v. State of Uttar Pradesh के निर्णय के सिद्धांतों को देखते हुए जोड़ा सुरक्षा पाने का हकदार है।

 

कोर्ट के निर्देश

हाईकोर्ट ने संबंधित थाना प्रभारी को निर्देश दिया है कि:

  • दोनों की सुरक्षा पर खतरे का तत्काल आकलन किया जाए।
  • खतरा पाए जाने पर आवश्यक पुलिस संरक्षण उपलब्ध कराया जाए।
  • युवती के परिवार और विवाह का विरोध करने वाले अन्य लोगों को बुलाकर कानून के अनुसार काउंसलिंग की जाए।


 

उत्तराखंड UTTARAKHAND