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देहरादून में भाजपा की सियासी सेंध, कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने थामा कमल

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By Pahadnews24
May 2, 2026 • 1 min read
देहरादून में भाजपा की सियासी सेंध, कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने थामा कमल
देहरादून में भाजपा की सियासी सेंध, कांग्रेस के कई दिग्गज नेताओं ने थामा कमल (Photo: Pahad News)

देहरादून | पहाड़ न्यूज़ 24

उत्तराखंड की राजनीति में एक बार फिर दलबदल का दौर तेज हो गया है। भारतीय जनता पार्टी ने कांग्रेस के किले में बड़ी सेंधमारी करते हुए कई कद्दावर नेताओं और पदाधिकारियों को अपने पाले में कर लिया है। देहरादून में आयोजित एक भव्य कार्यक्रम के दौरान इन नेताओं ने भाजपा की नीतियों पर भरोसा जताते हुए 'कमल' थाम लिया।

📍 भाजपा में शामिल हुए प्रमुख चेहरे

भाजपा ने इस बार कांग्रेस के उन नेताओं पर हाथ मारा है जिनका अपने क्षेत्रों में अच्छा-खासा जनाधार है:

  • मीना शर्मा: महिला कांग्रेस की पूर्व वरिष्ठ उपाध्यक्ष और रुद्रपुर नगर पालिका की पूर्व चेयरमैन।
  • लक्ष्मी राणा: रुद्रप्रयाग की पूर्व जिला पंचायत अध्यक्ष और पूर्व कांग्रेस प्रत्याशी।
  • दर्शन लाल आर्य: घनसाली विधानसभा सीट से कांग्रेस के पूर्व प्रत्याशी।

📦 कई अन्य पदाधिकारियों ने भी छोड़ा साथ

सिर्फ बड़े चेहरे ही नहीं, बल्कि कांग्रेस के सांगठनिक ढांचे से जुड़े कई अन्य नाम भी भाजपा के साथ हो लिए हैं:

  • अनिल शर्मा (पूर्व प्रदेश प्रवक्ता)
  • संजीव रस्तोगी, पूनम गुप्ता, मंजू जैन और श्वेता शर्मा।
  • इनके साथ ही सैकड़ों कार्यकर्ताओं ने भाजपा की सदस्यता ग्रहण की।

📊 सियासी मायने और प्रभाव

राजनीतिक जानकारों का मानना है कि यह घटनाक्रम आगामी चुनावों के लिहाज से अत्यंत महत्वपूर्ण है:

  1. भाजपा की रणनीतिक बढ़त: रुद्रप्रयाग, घनसाली और रुद्रपुर जैसे इलाकों में भाजपा ने विपक्ष को संगठनात्मक रूप से कमजोर कर दिया है।
  2. कांग्रेस के लिए चुनौती: एक साथ इतने प्रवक्ताओं और पूर्व प्रत्याशियों का जाना पार्टी के मनोबल को प्रभावित कर सकता है।
  3. जमीनी पकड़: चुनाव से ठीक पहले इन नेताओं का साथ आना भाजपा को बूथ स्तर पर और अधिक मजबूती प्रदान करेगा।

पहाड़ न्यूज़ 24 कमेंट: उत्तराखंड की राजनीति में चुनाव से पहले इस तरह का पलायन कोई नई बात नहीं है, लेकिन जिस तरह से एक के बाद एक कांग्रेस के विश्वसनीय चेहरे भाजपा का दामन थाम रहे हैं, वह कांग्रेस नेतृत्व के लिए आत्ममंथन का विषय है। अब देखना होगा कि कांग्रेस इस 'झटके' की भरपाई कैसे करती है।

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