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उत्तराखंड में ‘UKD (Democratic)’ को लेकर स्थिति अस्पष्ट: अलग-अलग नेतृत्व दावों और नियुक्तियों से बढ़ी राजनीतिक चर्चा, वैधता पर उठे सवाल

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By Pahadnews24
May 2, 2026 • 1 min read
उत्तराखंड में ‘UKD (Democratic)’ को लेकर स्थिति अस्पष्ट: अलग-अलग नेतृत्व दावों और नियुक्तियों से बढ़ी राजनीतिक चर्चा, वैधता पर उठे सवाल
उत्तराखंड में ‘UKD (Democratic)’ को लेकर स्थिति अस्पष्ट: अलग-अलग नेतृत्व दावों और नियुक्तियों से बढ़ी राजनीतिक चर्चा, वैधता पर उठे सवाल (Photo: Pahad News)

उत्तराखंड | पहाड़ न्यूज़ 24 (विशेष खबर)

उत्तराखंड की सबसे पुरानी क्षेत्रीय शक्ति, उत्तराखंड क्रांति दल (UKD) एक बार फिर अंतर्कलह और गुटबाजी के साये में है। संगठन में अनुशासनहीनता के चलते निष्कासित चेहरों और 'डेमोक्रेटिक' के नाम पर चल रहे नए दावों ने कार्यकर्ताओं और समर्थकों के बीच भ्रम की स्थिति पैदा कर दी है।

📍 'केंद्रीय अध्यक्ष' और 'पदों' की मची होड़

ताजा विवाद तब शुरू हुआ जब पार्टी से निष्कासित बताए जा रहे कमल जोशी ने खुद को "केंद्रीय युवा प्रकोष्ठ अध्यक्ष" घोषित कर दिया। वहीं दूसरी ओर, बलबीर नेगी द्वारा स्वयं को 'UKD (Democratic)' का अध्यक्ष बताकर पदों का वितरण किया जा रहा है।

⚠️ 2017 के विलय पर फिर मंडराया संकट?

राजनीतिक गलियारों में चर्चा है कि यह गतिविधियाँ पार्टी की मूल भावना के खिलाफ हैं। गौरतलब है कि:

  • वर्ष 2017 में उक्रांद के विभिन्न गुटों का विलय कर मूल UKD को पुनः स्थापित किया गया था ताकि क्षेत्रीय ताकतों को एकजुट रखा जा सके।
  • UKD (Democratic) जैसे मिलते-जुलते नामों का उपयोग करना न केवल तकनीकी रूप से विवादित है, बल्कि जनता के बीच भी भ्रम फैला रहा है।

❌ कार्यकर्ताओं में आक्रोश: "छवि बिगाड़ने की कोशिश"

पार्टी के समर्पित कार्यकर्ताओं ने इस पूरी गतिविधि को “स्वघोषित पद वितरण” करार दिया है। उनका कहना है कि:

  1. बिना आधिकारिक प्रक्रिया के पदाधिकारियों की नियुक्ति करना असंवैधानिक है।
  2. ऐसे कदम संगठन की साख को नुकसान पहुँचाने और व्यक्तिगत महत्वाकांक्षाओं को पूरा करने के लिए उठाए जा रहे हैं।
  3. अनुशासनहीनता के कारण बाहर किए गए लोग अब संगठन के समानांतर ढांचा खड़ा करने का प्रयास कर रहे हैं।

⚖️ आधिकारिक नेतृत्व की चुप्पी और राजनीतिक मायने

फिलहाल, उत्तराखंड क्रांति दल के आधिकारिक नेतृत्व की ओर से इन दावों पर कोई कड़ा या स्पष्ट खंडन सामने नहीं आया है। राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि यदि समय रहते इस भ्रम को दूर नहीं किया गया, तो आगामी चुनावों में इसका सीधा नुकसान क्षेत्रीय राजनीति को उठाना पड़ सकता है।

पहाड़ न्यूज़ 24 का विश्लेषण: क्या ये दावे किसी नई राजनीतिक धारा की शुरुआत हैं या केवल अस्तित्व बचाने की कोशिश? यह देखना दिलचस्प होगा कि उक्रांद का मुख्य नेतृत्व अपने संगठन के नाम और प्रतीकों के "अनधिकृत" उपयोग पर क्या कानूनी या संगठनात्मक कदम उठाता है।

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