ट्रंप के नए Visa Rule से भारतीयों की बढ़ी चिंता, H-1B पर 1 लाख डॉलर से ज्यादा फीस का प्रस्ताव
नई दिल्ली: अमेरिका में ट्रंप प्रशासन की सख्त होती वीजा और इमिग्रेशन नीतियों ने भारतीय छात्रों और पेशेवरों की चिंता बढ़ा दी है। H-1B वीजा से जुड़े नए प्रस्तावों और बढ़ती प्रोसेसिंग अवधि के बीच भारतीयों के लिए अमेरिका में पढ़ाई, नौकरी और स्थायी रूप से बसने का रास्ता पहले के मुकाबले अधिक अनिश्चित नजर आ रहा है।
H-1B वीजा के लिए 1,03,265 डॉलर फीस का प्रस्ताव
अमेरिकी डिपार्टमेंट ऑफ होमलैंड सिक्योरिटी ने सभी H-1B वीजा के लिए 1,03,265 अमेरिकी डॉलर की फीस प्रस्तावित की है। यह प्रस्ताव ऐसे समय आया है जब पहले से ही H-1B वीजा को लेकर नियमों को सख्त करने की प्रक्रिया जारी है।
पिछले साल जारी एक राष्ट्रपति आदेश में कुछ नए H-1B आवेदनों के लिए सामान्य शुल्क के अलावा 1 लाख डॉलर की अतिरिक्त फीस का प्रावधान किया गया था। इस फैसले को अदालत में कानूनी चुनौती भी मिली थी।
भारतीय पेशेवरों पर खास असर
अमेरिका में H-1B वीजा पाने वालों में भारतीय नागरिकों की हिस्सेदारी सबसे बड़ी है। उपलब्ध आंकड़ों के मुताबिक, अमेरिका की ओर से जारी कुल H-1B वीजा में भारतीयों की हिस्सेदारी करीब 71 फीसदी रही है। ऐसे में वीजा नियमों में होने वाले बदलावों का सीधा असर भारतीय आईटी प्रोफेशनल्स, इंजीनियरों और अन्य कुशल कर्मचारियों पर पड़ सकता है।
अमेरिका में काम कर रहे कुछ भारतीय पेशेवर वीजा एक्सटेंशन और स्टांपिंग में लग रहे लंबे समय के कारण यात्रा करने से भी बच रहे हैं। उन्हें आशंका है कि अगर वे अमेरिका से बाहर चले गए और समय पर वीजा स्टांपिंग नहीं हुई तो उनकी वापसी मुश्किल हो सकती है।
नौकरी जाने पर भी बढ़ेगी मुश्किल
प्रस्तावित बदलावों में H-1B वीजा धारकों के लिए नौकरी जाने के बाद मिलने वाली 60 दिन की ग्रेस पीरियड को खत्म करने का प्रस्ताव भी शामिल है। मौजूदा व्यवस्था में नौकरी छूटने के बाद कर्मचारी को नई नौकरी तलाशने या अपनी इमिग्रेशन स्थिति बदलने के लिए सीमित समय मिलता है।
यदि यह बदलाव लागू होता है, तो विदेशी कर्मचारियों के लिए नौकरी जाने के बाद अमेरिका में बने रहना और नई नौकरी तलाशना पहले की तुलना में काफी कठिन हो सकता है।
छात्रों की भी बढ़ी चिंता
अमेरिका जाने की तैयारी कर रहे भारतीय छात्रों के बीच भी चिंता बढ़ रही है। लंबे वीजा अपॉइंटमेंट इंतजार, सख्त नियम, बढ़ती शिक्षा लागत और अमेरिकी जॉब मार्केट में अनिश्चितता के कारण कई छात्र अब अमेरिका के साथ-साथ जर्मनी और दूसरे देशों को भी विकल्प के तौर पर देख रहे हैं।
OPT यानी Optional Practical Training के तहत विदेशी छात्रों को अमेरिका में पढ़ाई पूरी करने के बाद काम करने का मौका मिलता है। लेकिन वीजा और इमिग्रेशन नियमों में लगातार बदलाव के कारण छात्र अब अपनी पढ़ाई के बाद के करियर को लेकर पहले से ज्यादा सतर्क हैं।
‘अमेरिकन ड्रीम’ पर क्या होगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि अमेरिका की सख्त होती इमिग्रेशन नीति का असर सिर्फ वीजा आवेदनों तक सीमित नहीं रहेगा। इससे विदेशी छात्रों और पेशेवरों के अमेरिका जाने के फैसले पर भी असर पड़ सकता है।
नेशनल फाउंडेशन फॉर अमेरिकन पॉलिसी के आकलन के मुताबिक, ट्रंप प्रशासन की नीतियों के कारण उनके चार साल के कार्यकाल के अंत तक अमेरिका में कानूनी इमिग्रेशन में 33 से 50 फीसदी तक कमी आ सकती है।
हालांकि, अमेरिका में उच्च शिक्षा और विशेष तकनीकी क्षेत्रों में अवसर अभी भी आकर्षक बने हुए हैं। ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि भारतीय छात्र और पेशेवर अमेरिका का विकल्प पूरी तरह छोड़ने के बजाय अब बैकअप प्लान के साथ आगे बढ़ रहे हैं।
कुल मिलाकर, ट्रंप प्रशासन की नई वीजा नीतियों ने भारतीयों के बीच यह सवाल जरूर खड़ा कर दिया है कि आने वाले समय में अमेरिका का ‘अमेरिकन ड्रीम’ पहले की तरह आसानी से हासिल किया जा सकेगा या नहीं।