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सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के बाद बहस तेज, क्या न्याय में देरी बढ़ाती है लोगों की हताशा?

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By Pahadnews24
July 11, 2026 • 1 min read
सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के बाद बहस तेज, क्या न्याय में देरी बढ़ाती है लोगों की हताशा?
सुप्रीम कोर्ट में हंगामे के बाद बहस तेज, क्या न्याय में देरी बढ़ाती है लोगों की हताशा? (Photo: Pahad News)

नई दिल्ली: सुप्रीम कोर्ट में एक याचिका की सुनवाई के दौरान उस समय असामान्य स्थिति बन गई, जब स्वयं अपना पक्ष रख रहे याचिकाकर्ता प्रबल प्रताप सिंह ने अदालत की कार्यवाही के दौरान तीखी नाराज़गी जताई। मीडिया रिपोर्टों के अनुसार उन्होंने बेंच की ओर दस्तावेज़ फेंके और मुख्य न्यायाधीश के लिए आपत्तिजनक भाषा का प्रयोग किया, जिसके बाद सुरक्षा कर्मियों ने उन्हें कोर्ट कक्ष से बाहर ले जाया। मामला लखनऊ के एक पुलिस अधिकारी के खिलाफ एफआईआर दर्ज कराने की मांग से जुड़ा था, जिसे अदालत ने खारिज कर दिया। घटना के बाद सोशल मीडिया पर तीखी बहस छिड़ गई। एक वर्ग का कहना है कि वर्षों तक न्यायिक प्रक्रिया में देरी और बार-बार सुनवाई टलने से लोगों में हताशा बढ़ती है, हालांकि उनका मानना है कि इसका समाधान अदालत की गरिमा भंग करना नहीं हो सकता। वहीं दूसरा पक्ष इसे न्यायपालिका के प्रति अस्वीकार्य और अवमाननापूर्ण व्यवहार बताते हुए कह रहा है कि असहमति या नाराज़गी व्यक्त करने के भी कानूनी और मर्यादित तरीके होते हैं। फिलहाल, अदालत की कार्यवाही और घटना को लेकर विभिन्न प्रतिक्रियाएँ सामने आ रही हैं, लेकिन किसी भी पक्ष के दावों का अंतिम निष्कर्ष न्यायिक रिकॉर्ड और आधिकारिक तथ्यों के आधार पर ही माना जाएगा।


 

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